संक्षेपण लिखना सीखे । संक्षेपण का अर्थ, परिभाषा, नियम, प्रकार, महत्व और उदाहरण ( How to write sankshepan ?)

Table of Contents

संक्षेपण का अर्थ और परिभाषा | Meaning and Definition of Abbreviation

संक्षेपण का अर्थ है संक्षिप्त या छोटा करना होता है। किसी अनुच्छेद, परिच्छेद, विस्तृत कथा अथवा प्रतिवेदन को जितने कम से कम शब्दों में प्रस्तुत किया जाए जिसमें उस विषय का पूर्ण भाव एवं उद्देश्य स्पष्ट हो सके को उसे संक्षेपण कहते हैं। इस परिभाषा के अनुसार, संक्षेपण एक स्वतःपूर्ण रचना है। उसे पढ़ लेने के बाद मूल सन्दर्भ को पढ़ने की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती। सामान्यतः संक्षेपण में लम्बे-चौड़े विवरण, पत्राचार आदि की सारी बातों को अत्यन्त संक्षिप्त और क्रमबद्ध रूप में रखा जाता है। सरल तरीके से हम यह कह सकते हैं कि अनावश्यक बातों को लगभग हटाकर एक तिहाई शब्दों में उसकी आवश्यक एवं महत्वपूर्ण बातों को व्यक्त कर देना को ही संक्षेपण कहते है।

संक्षेपण के नियम | summarization rules
यधपि संक्षेपण के निश्र्चित नियम नहीं बनाये जा सकते, तथापि अभ्यास के लिए कुछ सामान्य नियमों का उल्लेख किया जा सकता है। वे इस प्रकार है-

(1) मूल सन्दर्भ को ध्यानपूर्वक पढ़ें। जब तक उसका सम्पूर्ण भावार्थ स्पष्ट न हो जाय, तब तक संक्षेपण लिखना आरम्भ नहीं करना चाहिए। इसके लिए यह आवश्यक है कि मूल अवतरण कम-से-कम तीन बार पढ़ा जाय।

(2) मूल के भावार्थ को समझ लेने के बाद आवश्यक शब्दों, वाक्यों अथवा वाक्यखण्डों को रेखांकित करें, जिनका मूल विषय से सीधा सम्बन्ध हो अथवा जिनका भावों या विचारों की अन्विति में विशेष महत्त्व हो। इस प्रकार, कोई भी तथ्य छूटने न पायेगा।

(3) संक्षेपण मूल सन्दर्भ का संक्षिप्त रूप है, इसलिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसमें अपनी ओर से किसी तरह की टिप्पणी अथवा आलोचना-प्रत्यालोचना न हो। संक्षेपण के लेखक को न तो किसी मतवाद के खण्डन का अधिकार है और न अपनी ओर से मौलिक या स्वतन्त्र विचारों को जोड़ने की छूट है। उसे तो मूल के भावों अथवा विचारों के अधीन रहना है और उन्हें ही संक्षेप में लिखना है।

(4) संक्षेपण को अन्तिम रूप देने के पहले रेखांकित वाक्यों के आधार पर उसकी रुपरेखा तैयार करनी चाहिए, फिर उसमें उचित और आवश्यक संशोधन (जोड़-घटाव) करना चाहिए। यहाँ एक बात ध्यान रखने की यह है कि मूल सन्दर्भ के विचारों की क्रमव्यवस्था में आवश्यक परिवर्तन किया जा सकता है। यह कोई आवश्यक नहीं है कि जिस क्रम में मूल लिखा गया है, उसी क्रम में संक्षेपण भी लिखा जाय। लेकिन यह अत्यन्त आवश्यक है कि उसमें विचारों का तारतम्य बना रहे। ऐसा मालूम हो कि एक वाक्य का दूसरे वाक्य से सीधा सम्बन्ध बना हुआ है।

(5) उक्त रुपरेखा को अन्तिम रूप देने के पहले उसे एक-दो बार ध्यान से पढ़ना चाहिए, ताकि कोई भी आवश्यक विचार छूटने न पाय। जहाँ तक हो सके, वह अत्यन्त संक्षिप्त हो। यदि शब्दसंख्या पहले से निर्धारित हो, तो यह प्रयत्न करना चाहिए कि संक्षेपण में उस निर्देश का पालन किया जाय। सामान्यतया उसे मूल सन्दर्भ का एक-तिहाई होना चाहिए।

(6) अन्त में, संक्षेपण को व्याकरण के सामान्य नियमों के अनुसार एक क्रम में लिखना चाहिए।

(7) उपर्युक्त सारी क्रियाओं के बाद संक्षेपण के भावों और विचारों के अनुकूल एक संक्षिप्त शीर्षक दे देना चाहिए। शीर्षक ऐसा हो, जो सभी तथ्यों को समेटने की क्षमता रखे। शीर्षक लघु और कम-से-कम शब्दोंवाला होना चाहिए।

संक्षेपण के प्रकार | types of abbreviations

समाचार का संक्षेपण – हर एक समाचारों के संक्षेपण में तिथि, स्थान तथा संबंध रखने वाले व्यक्तियों के नाम का उल्लेख किया जाना चाहिए अर्थात इस प्रकार के संक्षेपणों में शीर्षक प्रभावी होना चाहिए|

संवाद का संक्षेपण – हर एक संवाद का संक्षेपण आवश्यक नहीं होता. स्पष्ट दिखाई देनेवाला कथन को जो दिखाई न दे उस कथन में रहना चाहिए. उद्धरण चिह्नों (“ ”) को हटा देना चाहिए तथा संज्ञा के स्थान पर सर्वनाम का प्रयोग करना चाहिए|
पत्राचारों का संक्षेपण – सभी कार्यालयों में पत्राचारों के संक्षेपण की आवश्यकता होती है।

संक्षेपण का महत्व | importance of summarizing

संक्षेप करते समय उपयुक्त भाव के लिए मूल अवतरण के क्रम में परिवर्तन कर उसे अधिक संगत बना देता है। इसके साथ ही संक्षेपण करते समय वाक्यों की संगति रखना भी आवश्यक होता है जिससे की विचारों में कोई अन्तर न आ जाए। आज के समय में सब जगह संक्षेपण का महत्व है। अभी के जीवन में ऐसे व्यक्ति को अधिक महत्व दिया जाता है जो संक्षेप में बात कहता है और बेवजह में अपने कथन को फैलाव नहीं देता है।

संक्षेपण की विशेषताएँ – अच्छे संक्षेपण की क्या विशेषता होती है?

  • दिए गए अवतरण को तब तक पढ़िए जब तक कि उसका केंद्रीय भाव स्पष्ट ना हो जाए।
  • केंद्रीय भाव स्पष्ट होते ही उससे संबंधित मुख्य विचारों, वाक्यों को रेखांकित कर लीजिए |
  • इन रेखांकित वाक्यों क्यों को उत्तर पुस्तिका में अंतिम पृष्ठ पर रफ कार्य के रूप में किया जाना चाहिए।
  • उतारते समय ध्यान रहे कि कोई वाक्य ना छूटे ना ही कोई क्रम छूटे
  • सरल वाक्य को मिश्र वाक्य में बदलते हुए शब्दों के एक शब्द करते हुए पुनः लिखें।
  • पुनः लिखते समय उदाहरण दृष्टांत मुहावरे है कहावत है वह अनावश्यक शब्द हटा देना चाहिए।
  • भाषा स्वयं की हो लेकिन विचार लेखक के होना चाहिए |
  • अन्य भाषा का प्रयोग करना चाहिए।
  • उचित शीर्षक दीजिए शीर्षक छोटे से छोटा होना चाहिए |
  • शब्द संख्या के लिए आवश्यकतानुसार कम ज्यादा करें।
  • उत्तर के स्थान पर उतारने और शीर्षक के पास या अंत में शब्द संख्या कोष्टक में लिखें।

संक्षेपण के उदाहरण | examples of abbreviations

कथन : ऋतुराज बसन्त के आगमन से ही शीत का भयंकर प्रकोप भाग गया। पतझड़ में पश्चिम के पवन ने जीर्ण-शीर्ण पत्रों को गिराकर पेड़-पौधों को स्वच्छ और निर्मल बना दिया। वृक्षों और लताओं के अंग में नूतन पत्तियों के खिलने से यौवन की मादकता छा गयी। शीतकाल के ठिठुरे अंगों में नया फुरती उमड़ रही है तथा बसन्त के आगमन के साथ ही जैसे पुरानापन और पुरातन का प्रभाव छिप गया है. प्रकृति के कण-कण में नया जीवन का संचार हो गया है। आम के मंजरियों की गंध और कोयल का आवाज़, भँवरों का गुंजन सब ऐसा लगता है जैसे जीवन में सुख ही सुख है यह आनन्द के एक क्षण का मूल्य पूरे जीवन को अर्पित करके भी नहीं चुकाया जा सकता है। प्रकृति ने बसन्त के आगमन पर अपने रूप को इतना संवारा है और रचा है कि उसकी शोभा का वर्णन करना असंभव है।

शीर्षक : बसन्त ऋतु की शोभा
संक्षेपण : बसंत के आते ही शीत की कठोरता चली जाती हैं। पश्चिम के पवन ने वृक्षों के पत्ते गिरा दिये तथा वृक्षों और लताओं में नये पत्ते निकल आये। उनकी सुगन्ध से दिशाएँ महक उठीं। आम की मंजरियों से सुगंध आने लगे, कोयल कूकने लगी तथा फूलों पर भँवरे मँडराने लगे। प्रकृति में सर्वत्र नवीन जीवन का संचार हो उठा।

कथन : विश्वविद्यालय की कई महिमा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा रोब रहा है नालंदा का दस हजार विद्यार्थी और पन्द्रह सौ आचार्य थे। बौद्ध दर्शन, इतिहास, वेद, हेतु विद्या, न्याय शास्त्र, व्याकरण, चिकित्सा शास्त्र, ज्योतिष आदि के शिक्षण की व्यवस्था इस विश्वविद्यालय में था। कई विख्यात आचार्यों का नाम नालंदा से जुड़ा था। लेकिन नालंदा के इतिहास में काला धब्बा भी लग गया है। यह काला धब्बा नालंदा के पुस्तकालय को लेकर है। बख्तियार खिलजी के आक्रमणों से देश की जो सबसे बड़ी हानि हुई वह थी वहाँ के इन पुस्तकालयों को आग के हवाले करना। इस अग्निकांड में वे अमूल्य ग्रंथ सदा के लिए भस्म हो गए। जिनका उल्लेख मात्र तिब्बती और चीनी ग्रंथों में मिलता है। तिब्बती विवरणों से पता चलता है कि नालंदा में पुस्तकालयों का एक विशिष्ट क्षेत्र था।

शीर्षक: नालंदा विश्वविद्यालय की महिमा
संक्षेपण : नालंदा विश्वविद्यालय की शिक्षा के क्षेत्र में कभी काफी रोब रहा है। यहाँ बौद्ध दर्शन, इतिहास, वेद शास्त्र, हेतु विद्या, न्याय शास्त्र, व्याकरण, चिकित्सा, ज्योतिष आदि सभी विषयों की उत्तम व्यवस्था थी। यहाँ कई नामी शिक्षक थे। किंतु बख्यिार खिलजी के आक्रमणों के समय इसके पुस्तकालयों को जला दिया गया जिसके कारण इसमें स्थित अमूल्य ग्रंथ नष्ट हो गए जिनकी चर्चा केवल तिब्बती और चीनी ग्रंथों में मिलती है।

कथन : भारत के पास कुछ ऐसी संपत्ति हैं तथा लाभ हैं जिनके बारे में विश्व के कुछ देश गर्व से दावा कर सकते हैं। विश्व एक बौद्धिक समाज में परिवर्तित हो रहा है जहाँ धन का स्रोत होगा। यही वह समय है जब भारत खुद को एक बौद्धिक शक्ति में बदलने और फिर अगले दो दशकों के भीतर एक विकसित देश बनने के लिए इस अवसर का लाभ उठा सकता है। इस रूपांतरण के लिए यह जानना आवश्यक है कि हम प्रतिस्पर्धात्मकता के मामले में कहाँ हैं।

शीर्षक: प्रतिस्पर्धा की पहचान
संक्षेपण : भारतीय को प्रतिष्ठित अतीत तथा वर्तमान उपलब्धियों व भविष्य को जानने की आवश्यकता है क्योंकि संसार बौद्धिक होता जा रहा है और ज्ञान शक्ति व धन का स्रोत बनता जा रहा है जिसके विकास के लिए उसे प्रतिस्पर्धा में स्वयं को पहचानना होगा कि वह कहाँ है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *